Tuesday, February 28, 2017

मेरी बाती की लौ

चाँद उतरा था
मेरे आँगन में लिए
सूरज की चंद शुआओं का नूर
मैंने पलटाया उसे ये कह कि -
चाहा है जिस शम्स को तहेदिल से भरपूर
यूँ कैसे ले लूँ
कैसे करूँ टुकड़ो में बटी चाहत को क़ुबूल?
दस्तूरे इश्क़ और रस्में व्यापार भी हैं क़ायल इस के
उसूल से लाज़िम है कि मिले
पुरे के बदल पूरा ही हुज़ूर,
और मैंने कब नाप तौल में अपने
कोई चूको कसार छोड़ी है
तो फिर जिसकी आंच में बस के
मैंने सँवरी सेहर जानी है
उसके मुकम्मल की रहूंगी
मुंतज़िरो मुश्ताक़ ज़रूर
गो कि गहन है नागवार बहुत
हैं यकीन क़ुदरत पर
आएगा कभी मेरे सुबह की वो रौनक़ बन कर
वऱना रहे रात सही
ख़िलक़त से गुफ़्तार सही
चाँद जाओ कि मेरी बाती मैं
लपट बाकी है
गो है कमजोर सही,
बीच वीरानों में वफ़ा से जलती तो है
ड्योढ़ी पे ठहरे अन्धेरो की है परवाह नहीं
मेरी नज़रों को इस ढिबरी की लौ में
सिमटने की आदत सी है.



Monday, February 27, 2017


हर उम्मीद
हर अहसास से
झोली ख़ाली है मेरी ।

Saturday, February 25, 2017

ढूँढती हुँ मैं
उन नज़रों को
जहाँ शोख़ी के साथ सच की शान शोभती थी
किरदार और क़ुदरत साथ मिल के
प्यार के सच्चे रंगों से होली खेलते थे
यूँ चढ़े मन पे
कि वक़्त की चाल ने
रंग पक्का कर दिया
ऐसा -
साँझ की किरणों को भी
ये उजाला देते हैं.।

Friday, February 24, 2017

being authentic
has its price and perk
the world sees you as a jerk
however -
heart  is whole
no shadows lurk.
i love 
so i endure,
you are
so i thrive.
so be
i set you free.

Thursday, February 23, 2017

Test me not
I refuse to scribe
On your test page -
Non action, non violence is lesson
Imparted by each and every sage!
आज के सन्नाटे
को काट रही है फिर
झकझोरती हवाओं की सायँ सायँ
फ़र्क़ बस ये है -
कि पटना की हवा में लू की धधक थी
परदेस मे सर्द बर्फ़ीली फ़िज़ा से है जुस्तजू।

गुचों की रंगों बू से
अपना गुलदस्ता सजाने के लिए
खून और पसीने से सींचता है, बाग़बान
ना कि सोख्ता है सिर्फ पाने के लिए. 

सच है

कभी उल्फत कभी नखरों
के उलझाओ से
कभी विनती कभी चूमकार से
कभी तेज तकरार से
कभी गुस्से में भेड़े किवाड़ से
या प्रीत की गुफ़्तार से,
हर परदे की आड़ से परख के
रूप एक ही सच का पाया
सरगोशी करता इकरार से -
रस्मों के दिए अधिकार से परे
हमें तुम से प्यार है।


Wednesday, February 22, 2017

No smooth ascent or descent
on elevators and escalators
I see-saw
Joyriding through life!

बहाओ

कुछ के कटाक्ष
मन तड़पा गए 
कुछ की अनकहे सहज भाव 
दिल सहला गए 
फिर बुद्ध सज्जन की सरगोशि 
कर्णस्पर्श कर ये समझा गए -
बस आज से आज ही तलक 
तो जीने की बात है
कल कोई साथ था 
आज किसी ने छोड़ा हाथ है 
क्या फ़र्क़ पड़ता है जब कल 
तुम्हारे ही प्रांगण में 
फिर सब से मुलाक़ात है!

Sunday, February 19, 2017

कल बीत गया
आज ठहरा है 
आने वाला कल 
है बेपरवाह 
कि तुम पे भरोसा गहरा है.
सजदा हर हाल में
शुक्र का लज़िम हुआ
नाखुदा ना सही
इश्क़ के सैलाब में
सोज़े सनम के अंजाम में
हुब्बे खुदा तो हासिल हुआ।

Saturday, February 18, 2017

worth a thousand words
is silence
that instills knowing
no hurt no pain
can undo meaning
of what being
with you brings.
It's morning time
For reflection -
Listening to heart
I seek to answer
The allegation -
'You don't care'
Not true - I object
Me Lord
More than I care
To claim
Or, be rightfully claimed
In love -
I care
To give and receive
what's just and fair.

Friday, February 17, 2017

तुम्हारी आँखों से दुनिया जब जानती थी
गुलों में रंगो, बू थी
पलटी नज़र तो ख़िजाँ बढ़ी -
इस के आँगन में
मैं ने ख़ुद को पहचाना है. 
ना तुम दामन छोड़ते हो
ना मन विरह का सिरा थामता है
धूप दे झलक अगर
एक भी किरण से
तो दीवाना दिल झूमता, मचल
उड़ने का बहाना माँगता है.

not ready, yet set to go

Small steps
Tiny measures
Everyday,
To withdraw
Inch into oblivion
It feels safe to belong
To today. 
इंसानियत का साथ
स्वार्थ में सोखा
कोरा, अधूरा होता है -
चाँद की चाँदनी
धूप की रोशनी
चिड़ियों की रागिनी
में बसूँ कुछ ठौर
फिर तो ये साँस चले।
कुछ ने ख़ूब साथ निभाया है मेरे दर्द में
खुदा करे कभी उन्हें कोई चोट ना हो.

Monday, February 13, 2017

I'd thought this year
I will finally
Have my Valentine
He'll pamper my soul
Will make me feel dear
Until all hopes
Were stripped away
To bare
Soul of the man -
Its sold
It's captive to fear!

प्यार के बलात्कार पर 
सुना है
समूची खिलकत रोती है.
और तुम्हारी क़ुदरत?
क्या ख़ामोश 
इस रुदन के साक्षी रहोगे?
 
When love chooses
To desecrate
All good and beauty
Fail to avail;
Simplicity is easy casualty
Even if staying alive
Is at stake!
Goodness and simplicity
Said to allure of deceit
That we withhold and restrain
Is not coz there isn't any pain
We hold fort
For love and peace,
Keep sush
Endure, not hurt to regain
For justice to prevail
We'll not push
Nor endeavour to get even
But hey ho -
Heed be warned
Respect - my lines
For I will not let you trespass
Beyond your boundaries of  lust
To slaughter self worth
Within my peaceful domain.

Wednesday, February 08, 2017

बिन मानी चिराग़ों को बुझा के
थपक दो सूला दो
मेरे कल को भुलवा दो 
क़ि अब सच सींचने को
और आंसू नहीं मेरे पास ।

Tuesday, February 07, 2017

Their eyes met
for a moment to get 
glimpse of Self
in the other's soul.
Both were a part filled bowl,
that clanged for a while 
to cheer and mate, 
to quench
with fervour 
they attempted
to devour 
to take fill of the other
without a pause to exchange 
or, give more of one
to other 
so half that's better 
could sustain -
they moved on,
for illusionary gain..

They departed 
each on way 
chosen on preference of their own
using urgings of mind,
despair and despise,
and not dictums of heart
to guide 
Which path they'd walk
paths that had been trod before
by so many akin
but not by traveller who listens
to solo tune that's their own
they cared not to savour 
the nectar 
they'd blessed with
in depths of their soul
Like so many other
they chose to suckle, 
not nourish nor offer succour
to be togetheras One -
being complete 
in their whole and sole.

Little wonder it was -
they were lost again
from being near to Eden
they turned 
as they chose -
to further wander 
on the lone!

Friday, February 03, 2017

Simplicity is my flaw
I'm told
When I lived so
Believing -
It's Your will Your law!

offering

Overcoming all fears
I've bid adieu
To all that takes
Me away from You.